4/6/09

दिल्ली में आने के बाद मेरी आपबीती

1 जुलाई 2007 को मैं पहली बार दिल्ली आया। दिल्ली आने के बाद मैं 10 रोज खुब घुमा बड़ा ही मजा आया मेट्रो में बस मे आटों में बैठकर जो दिल्ली की खास जगहे थी सबको घुमा और 10 दिन बाद वापस घर जाने की तैयारी करने लगा तो दिदि बोली यहां पर कुछ ट्राई क्यों नहीं करते हो पढ़ाई भी तुम्हारी पूरी हो चुकी है। तो मैनें पता किया कि सेक्टर 40 में एक मैडम मीडिया मैगजीन निकालती है। मैंने सोचा एक बार इंटरव्यू देने में क्या दिक्कत है। मैने वहां के आफिस में फोन किया तो मैडम ने बोली तुम 14 जुलाई को इंटरव्यू देने आ जाना। मै उस दिन गया तो मेरा जमकर इंटरव्यू हुआ। आखिरकार मेरा वहां पर हो गया। 7 महिना वहां पर काम किया फिर मैंने उस काम को छोड़ दिया। दिदि से बोला कि मैं कुछ दिनों के लिए घर जाना चाहता हूं क्योंकि मां कि तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तो मै घर गया वहां पर डेढ महिने रहा। वापस आया तो मैं 24 फरवरी को लुधियाना दैनिक भास्कर में गया वहा संपादक राजिव सर ने मेरा इंटरव्यू लिया मेरा वहा हो गया। और मैं 25 फरवरी को ज्वांइन भी कर लिया। वहां पर मैंने चार महिने काम किया। फिर वापस दिल्ली आ गया। और मै यशवंत सर के साथ भड़ास4मीडिया मे काम करने लगा। दिल्ली जैसे अनजान शहर में मैंने यशवंत सर से बहुत कुछ सिखा और अभी भी सिख रहा हूं।
दीपक सिंह

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