4/25/09

योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए

व्यवसाय या नौकरी, चाहे आप कुछ भी करते हो, कई बार इसकी व्यस्तता हद से ज्यादा बड़ जाती है। किसी भी काम को करने का उद्देश्य यही होता है कि मनचाहा फल प्राप्त हो सके। इसका लंबे घंटो की कड़ी मेहनत से कोई लेना- देना नहीं होता। सभा किसी भी संस्था का अभिन्न अंग नही होता हैं।
मेरा एक मित्र ऐसे छोटे-छोटे मुद्दों पर भी मीटिंग बुलवा लेता है जहां एक नोट या मीमो भी काफी होता। जब मैंने उससे इस बारे में पुछा तो उसने कहा कि वह कोई भी फैसला लेने से पहले दूसरों से जानकारी और नजरिए एकत्र कर लेना चाहता है। कोई भी मीटिंग तभी बुलाई जानी चाहिए जब उसकी सही मायने में जरूरत हो, क्योंकि यह हमेशा जानकारी एकत्र करने का सही माध्यम नहीं होती। मीटिंग से क्या उम्मीदें है, उन्हे स्पष्ट रूप से सबके सामने रखा जाना चाहिए तथा एजेंडा प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
बेहतर तो यही है कि एजेंडा सबको पहले बाट दिया जाए ताकि लोग उसे पढ़कर पूरी तैयारी के साथ आए और बेहतर नतीजा मिल सके। यदि मीटिंग का प्रत्येक सदस्य अपने-अपने तरीके से तैयार होकर आएगा तो उत्पादक परिणाम सामने आएगे। मीटिंग के शुरू और खत्म होने का भी समय देना चाहिए। अगर आप को लगे कि किसी खास मुद्दो पर चर्चा में ज्यादा समय लग रहा है तो आप उसे दूसरी मीटिंग के लिए छोड़ दे। ताकि सभी नई मीटिंग में उस मुद्दे पर खुल कर चर्चा कर सकें।

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